Starlink: सैटेलाइट से इंटरनेट देने का कॉन्सेप्ट नया नहीं है. लेकिन जिस तरह से Elon Musk ने इसकी प्लानिंग की है, आने वाले समय में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइड करने का तरीका बदल सकता है.

मौजूदा समय में ज्यादातर जगहों पर इंटरनेट फाइबर ऑपटिक्स के जरिए दिए जाते हैं. फाइबर  ऑपटिक्स एक टेक्नोलॉजी है जिसमें लाइट के जरिए डेटा ट्रैवल करता है, लेकि Elon Musk का Starlink इससे अलग है. 

Starlink में फाइबर ऑप्टिक्स नहीं होगा, बल्कि यहां डायरेक्ट सैटेलाइट से लोगों को इंटरनेट मिलेगा. इसके लिए Elon Musk अपनी Space X कंपनी के Falcon रॉकेट के जरिए LOE सैटेलाइट भेज रहे हैं. 

2019 से ही Starlink के सैटेलाइट को भेजा जाना शुरू कर दिया गया था. Elon Musk का टारगेट ये है कि दुनिया के हर कोने में इसके जरिए इंटरनेट पहुंचाया जाए 

एलॉन मस्क का प्लान टोटल 12 हजार LOE सैटेलाइट को ऑर्बिट में भेजने का है. फिलहाल लगभग 1700 सैटेलाइट भेज दिए गए हैं. अमेरिका के कई जगहों पर Starlink की सर्विस यूज की जा रही हैं.  

ट्रेडिशन सैटेलाइट के मुकाबले Starlink के सैटेलाइट्स धरती के 60 टाइम्स नजदीक होंगे. इसी वजह से यूजर तक कम लेटेंसी के साथ इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचेगी. 

Elon Musk ने ये खुद कहा है कि कम दूरी में Starlink की सर्विस फाइबर ऑप्टिक्स की लाइट से 40% ज्यादा फास्ट होगी. 

अनलिमिडेट डेटा यूजर्स को मिलेगा. डिवाइस की बात करें तो आपकी छत से आसामान दिखाई देना जरूरी है. सैटेलाइट से एंटेना और फिर एंटेना से आपके घर पर लगे राउटर तक इंटरनेट जाएगा