शिवराज सरकार में सिंधिया समर्थकों का पलड़ा भारी, 19 समर्थकों में से 11 मंत्री बने

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नई टीम में सिंधिया समर्थक पूर्व विधायक फायदे में रहे हैं। गुरुवार को 28 मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें 9 सिंधिया खेमे से हैं। 3 मंत्री पहले शपथ ले चुके हैं। बीते सौ दिन में सिंधिया समर्थकों और कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। कमलनाथ सरकार में 6 मंत्री सिंधिया समर्थक थे। शिवराज सरकार में 11 मंत्री सिंधिया कोटे से हैं। इनमें कांग्रेस छोड़कर आए और आज मंत्री बने 3 और नेताओं को जोड़ लें, तो इनकी संख्या 14 हो जाती है। इस तरह सिंधिया समर्थकों और कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को 230% का फायदा हुआ है। उल्लेखनीय है कि कमलनाथ सरकार के पतन से पहले सिंधिया समर्थक 19 कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफा दे कांग्रेस छोड़ दी थी।

सिंधिया खेमा इस तरह फायदे में

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कमलनाथ सरकार में सिंधिया खेमे के 6 विधायक मंत्री थे। ये थे- गोविंद सिंह राजपूत, तुलसी सिलावट, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, प्रभुराम चौधरी और महेंद्र सिंह सिसोदिया। ये सभी शिवराज की सरकार में अब कैबिनेट मंत्री बन चुके हैं। इनके अलावा 5 और नेता गुरुवार को शिवराज की टीम में मंत्री बने हैं। ये हैं- राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, बृजेंद्र सिंह यादव, गिर्राज दंडोतिया, सुरेंद्र धाकड़ और ओपीएस भदौरिया। राज्यवर्धन कैबिनेट मंत्री बने हैं। बाकी 4 राज्य मंत्री बनाए गए हैं।इस तरह कमलनाथ सरकार में सिंधिया खेमे से 6 नेता मंत्री थे, जबकि शिवराज सरकार में उनके खेमे से 11 नेता मंत्री बन चुके हैं।

जानिए, सिंधिया खेमे से मंत्री बनने वाले 11 मंत्रियों के बारे में

महेन्द्र सिंह सिसोदिया कमलनाथ सरकार में भी भी श्रममंत्री रह चुके हैं। महेंद्र सिसोदिया बमोरी (गुना) विधानसभा सीट से चुने गए हैं। 2018 में लगातार दूसरी बार जीत हासिल की।

2008 में पहली बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे। 25 दिसम्बर 2018 को मुख्यमंत्री कमलनाथ के मंत्रिमंडल शामिल हुए थे। सिंधिया के कट्‌टर समर्थक। सार्वजनिक स्थानों पर भी सिंधिया के पैर छुने से नहीं झिझकते।

कमलनाथ सरकार में भी मंत्री रह चुकी इमरती देवी अब फिर से मंत्री बनी है। पहली बार 2008 में विधायक चुनी गई थी। पहली बार मंत्री बनी तो शपथ भी ठीक से नहीं पढ़ पाईं थीं। 2019 में गणतंत्र दिवस पर भाषण न पढ़ पाने के कारण सुर्खियों में रही थी। एक बार इनका कुत्ता चोरी हुआ था तब रोते हुए वीडियो सामने आया था।

सुरेश धाकड़ पौहरी से विधायक हैं और सिंधिया के काफी करीबी माने जाते हैं। जब मध्यप्रदेश में सियासी उलटफेर चल रहा था, तब सुरेश धाकड़ भी बंगलुरू जाने वाली विधायकों में शामिल थे। उसी दौरान उन्हें बेटी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। सिंधिया ने उन्हें घर लाने के लिए विशेष प्लेन की व्यवस्था की थी।

49 साल के ओपीएस भदौरिया मेहगांव सीट से विधायक चुने गए हैं। सिंधिया के कट्टर समर्थक हैं। कमलनाथ सरकार के दौरान कांग्रेस विधायक रहते हुए भी उन्होंने सरकार के खिलाफ बगावती तेवर दिखाए थे और कमलनाथ सरकार पर झूठे केस में फंसाने का आरोप लगाया था।

दिमनी सीट से चुन कर आए गिर्राज दंडोदिया पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। अपने इलाके में अच्छा रसूख रखने वाले दंडोतिया तब चर्चा में आए थे, उन्होंने एक विवादास्पद बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि यदि बीजेपी के नेता खून बहाएंगे तो हम गर्दन काट कर लाएंगे।

ब्रजेंद्र सिंह यादव मध्यप्रदेश की मुंगावली सीट से विधायक चुने गए हैं। 2018 में उपचुनाव में पहली बार विधायक चुने गए थे और उसके बाद विधानसभा चुनाव में भी सिंधिया के करीब होने का कारण टिकट मिला और जीत हासिल की।

प्रभुराम चौधरी कमलनाथ सरकार के दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री थे। प्रभुराम चौधरी वर्ष 1985 में पहली बार आठवीं विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। चौधरी वर्ष 1991 में मप्र कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य, वर्ष 1996 में संयुक्त सचिव और वर्ष 1998 में महामंत्री बने। वे मप्र कांग्रेस में कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।

राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव को ज्योतिरादित्य सिंधिया का करीबी माना जाता है, उनके पिता भी राजनीति में थे और माधवराव सिंधिया के काफी करीबी थे। राज्यवर्धन सिंह साल 1990 में लुफ्तांसा में मार्केटिंग मैनेजर की नौकरी करते थे।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के सबसे खास व्यक्ति माने जाते हैं। कमलनाथ सरकार में सिंधिया तुलसी सिलावट को उप मुख्यमंत्री बनवाना चाहते थे। इसी बात को लेकर कमलनाथ से उनके विवाद की खबरें सामने आईं थीं।

बुंदेलखंड में सबसे बड़े सिंधिया सर्मथक नेता माने जाते हैं। सुरखी से विधायक हैं। कमलनाथ सरकार में भी मंत्री थे।

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ज्योतिरादित्य सिंधिया।



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