अप्रैल 2023 तक पटरियों पर दौड़ने लगेंगी 151 प्राइवेट ट्रेनें, 16 डिब्बों की होंगी, यात्रियों को एयरलाइंस की तरह सुविधाएं मिलेंगी

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देश में अप्रैल 2023 तक 151 प्राइवेट ट्रेनें पटरी पर दौड़ती नजर आएंगी। भारतीय रेलवे ने गुरुवार को इसका ऐलान किया। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने कहा कि अभी 28,00 से ज्यादा एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें चल रही हैं। इनमें केवल 5% ट्रेनों को ही चलाने के लिए प्राइवेट कंपनियों को दिया जा रहा है। यह पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीई) मॉडल के तहत होगा। बाकी 95% ट्रेनें रेलवे की तरफ से ही चलाई जाएंगी।

रेलवे के मुताबिक इन प्राइवेट ट्रेनों को 109 रूटों पर चलाया जाएगा। प्रत्येक ट्रेन में कम से कम 16 डिब्बे होंगे। रेलवे के अनुसार इनमें से ज्यादातर आधुनिक ट्रेनों का निर्माण भारत में ''मेक इन इंडिया'' के तहत होगा। इसे चलाने वाली प्राइवेट कंपनी ही उसके मेंटेनेंस, खरीद और ट्रांसपोर्टेशन के लिए जिम्मेदार होगी।

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160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी
ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी। इससे कम समय में यात्री अपने डेस्टिनेशन तक पहुंच सकेंगे। रेलवे के अनुसार ट्रेनों को चलाने वाला प्राइवेट यूनिट, भारतीय रेलवे को ढुलाई शुल्क, वास्तविक खपत के आधार पर बिजली का पैसा देगा। रेलवे ने कहा, ''इन ट्रेनों का परिचालन भारतीय रेलवे के पायलट और गार्ड करेंगे।

मॉडर्न टेक्नोलॉजी लागू करना मकसद, ट्रेनें मेक इन इंडिया के तहत बनेंगी
इस पहल का उद्देश्य आधुनिक टेक्नोलॉजी को सामने लाना है, जिससे मेंटनेंस का बोझ कम हो। इससे ट्रांजिट टाइम में कमी आएगी। रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, सुरक्षा का भरोसा मजबूत होगा और यात्रियों को विश्वस्तरीय यात्रा का अनुभव होगा। इस परियोजना के लिए रियायत की अवधि 35 साल होगी।

एयरलाइन जैसी सुविधाएं मिलेंगी
रेलवे के अनुसार इन ट्रेनों में यात्रियों को एयरलाइन जैसी सेवाएं मिलेंगी। निजी इकाइयां इन प्राइवेट ट्रेनों के किराए को तय करने के अलावा खान-पान, साफ-सफाई और बिस्तरों की आपूर्ति करेंगी। अच्छी सुविधाएं होने से इन ट्रेनों का टिकट भी फ्लाइट की तरह ही महंगे होंगे।

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रेलवे ने कहा कि अभी 5% ट्रेनों को ही चलाने के लिए प्राइवेट कंपनियों को दिया जा रहा है, बाकी 95% ट्रेनें रेलवे की तरफ से ही चलाई जाएंगी।



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